डॉ. राजवीर सिंह
नई दिल्ली। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, फैटी लिवर और आर्थराइटिस जैसी बीमारियां अब कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बना रही हैं। सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर के अनुसार, इसके पीछे बदलती जीवनशैली, खराब खानपान, मानसिक तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी प्रमुख कारण हैं।
डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि करीब दो दशक पहले ये बीमारियां आमतौर पर 50 साल की उम्र के बाद देखने को मिलती थीं, लेकिन अब 30 साल की उम्र के बाद ही लोग इनसे पीड़ित होने लगे हैं।
बदल गया है खानपान का तरीका
डॉ. किशोर के मुताबिक, पहले लोग दिन में दो से तीन बार भोजन करते थे, लेकिन अब बीच-बीच में कुछ न कुछ खाते रहने की आदत बढ़ गई है। लोग भोजन तो ज्यादा कर रहे हैं, लेकिन उसके अनुपात में एक्सरसाइज नहीं कर रहे। रोटी-चावल जैसे पारंपरिक भोजन की जगह फास्ट फूड का सेवन भी तेजी से बढ़ा है।
How to Prevent Diseases? l Dr. Jugal Kishore Explains l Full Podcast
कम हो रही फिजिकल एक्टिविटी
ऑनलाइन सुविधाओं के कारण लोगों को जरूरत का सामान खरीदने के लिए भी घर से बाहर नहीं निकलना पड़ता। इससे उनकी शारीरिक गतिविधियां लगातार कम हो रही हैं। एक्सरसाइज न करने से मोटापा, हाई बीपी और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
नियमित एक्सरसाइज से दिल की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे याददाश्त, नींद और सोचने-समझने की क्षमता में भी सुधार होता है।
मानसिक तनाव भी बड़ी वजह
डॉ. जुगल किशोर के अनुसार, कभी-कभी तनाव होना सामान्य है, लेकिन लगातार तनाव में रहना सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। लंबे समय तक मानसिक तनाव रहने से मोटापा, हाई बीपी और बालों के झड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे शरीर में हार्मोन का संतुलन भी बिगड़ सकता है।
जीवनशैली में बदलाव जरूरी
डॉ. किशोर का कहना है कि कम उम्र में होने वाली गंभीर बीमारियों से बचने के लिए लोगों को अपने खानपान में सुधार करना चाहिए। फास्ट फूड का सेवन कम करने, नियमित एक्सरसाइज करने और मानसिक तनाव को नियंत्रित रखने से कई बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।